अर्गला

इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की पत्रिका

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काव्य पल्लव

नीरा त्यागी

मुझे मुक्त कर दो.

भीतर की औरत ने
पत्नी से पूछा
तुझे क्या मिला ?

पति का प्यार ?
ड्राइंग रूम की
दीवार पर सजा
फेमली फोटोग्राफ,

ग्रीन बेल्ट को
छूता ड्रीम हाउस,

सड़क नापने
को कार,

परिचितों, अपरिचितों
का ईर्ष्या भाव,

जब तुम तुम थी
आसमाँ, सागर
पलकों में बसते,
आईना तुम्हें
दिन-रात पढ़ता,
दिल और आत्मा को
आँखों की नज़र करता

पकड़ती हो
साइड मिरर में
भागती उम्र की रफ़्तार,

होती है लाल बत्ती पर
फुर्सत से आँखे चार,

अस्तित्व मिटा
इच्छाएँ क़तर
दोष मुक्त हो
तुम पत्नी से
परफ़ेक्ट बनी,
भीतर की अग्नि
आँसुओं से भी
ना बुझी

अगले क्षण क्या करना है
का साफ्टवेयर
तुम्हारे हाथ पाँव में फिट है
आत्मा को ट्रेस
दिल और दिमाग में
उसे डाउनलोड कर लो
ममता, मंगलसूत्र
ग्लास सीलिंग चटखने की
धुन में तर लो
मुझे मुक्त कर दो.

आज की ताज़ा ख़बर

अजनबी
जिसने रात के अँधेरे में
बलात्कार किया

दुश्मन
जिसने सामने से
प्रहार किया

पति
जिसने शराब पीकर
पत्नी को पीटा

नेता
जिसने पैसे के लिए
कुर्सी का इस्तेमाल किया

प्रेमी
जिसने शहर से शर्माजी की
बेटी भगाई

चौंक गई होगी इनको
न्यूज़ चैनल, अख़बार की
सुर्ख़ियों में देख कर
चाल तेज़ हो गई होगी
पड़ोस और सड़क के
नुक्कड़ पर भाँप कर

कभी ध्यान से देखा है
बगल में लेटे इंसान को.

तुम्हारे बालों में अंगुलियाँ
आँखों में दूसरी के
सपने बुन रहा है

मौका परस्ती की करेंसी
इंटरनेट, ब्लूटूथ पर
कैश कर रहा है

इंसानियत की दुहाई दे
तुम्हारा विश्वास
निगल रहा है

दुनिया के मुख पर कालिख
अपने पर इम्पोर्टेड आफ्टर शेव
मल रहा है

तुम्हारी करुणा और प्रेम से
अपने अहम का
पेट भर रहा है

गुनाहों का गुलदस्ता
सिल्वर रैपिंग में लपेट
सुबह-शाम भेंट कर रहा है

खुश रहने का
वरदान दे
भगवान बन रहा है

सुर्खियों से बच
न्यूज़ चैनल से कट
अनादि काल से
इंसान और भगवान
तेरी ख़ामोशी का
कवच पहन
तेरी ही अंतरात्मा का
खून कर रहा है.

© 2009 Neera Tyagi; Licensee Argalaa Magazine.

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