अर्गला

इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की पत्रिका

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अनुसृजन

देवेंद्र चौबे

प्रेम एक

मैं एक नदी बनना चाहता हूँ
अगर मेरी प्रेमिका
एक मछली हो
और वह मेरी लहरों पर
तैरती जाये.

प्रेम दो

मैं जंगल बनना चाहता हूँ
अगर मेरी प्रेमिका
एक छोटी चिड़िया हो
और वह मेरे घने वनों में
उड़ती रहे.

प्रेम तीन

मैं अवशेष बनना चाहता हूँ
अगर मेरी प्रेमिका सदा हरित लता हो
और मेरे ऊपर माथे चढ़ सकती हो.

© 2009 Devendra Chaubey; Licensee Argalaa Magazine.

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