अर्गला

इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की पत्रिका

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काव्य पल्लव

हरेराम समीप

साथी आ

औजार
सड़क
सेल
शोभा यात्रा
चीख
योगफल
धीरज
कविता-भर जमीन
आस न छोड़ो
शब्द
पूजा

साथी आ
मेरा दुख
वर्णमाला के बाहर
तुम्हारा इंतजार कर रहा है

साथी आ!

औजार

'समीप'!
शब्दों को तरतीब देकर
तुम समझते हो
कि अब
तुम्हारा काम रह गया है बस
प्रतीक्षा करना
कि तरतीबदार शब्दों की लड़ी
फुरफुराएगी और
तुम्हारा शाब्दिक डायनामाइट
विस्फोट करेगा
दुखों का ये पहाड़ ढहेगा,
आगे रास्ता खुलेगा!

परंतु लम्बे इंतजार और
इतने प्रयत्नों के बावजूद
अभी तक तुम
मल रहे हो अपने हाथ
क्यों?
क्या सोचा कभी?

'समीप' मेरे दोस्त!
तुम शब्दों को कभी
नहीं बना पाए
छैनी, हथौड़ा या कुदाल
कि वे करते अपना काम,
तोड़ते पहाड़
और
बनाते अपनी राह.

सड़क

जाने कहाँ बिलर गई है
सड़क!

कहा तो यही गया था गाँव में
कि राजधानी से
चल पड़ी है सड़क
गाँव के लिए

अब जाने कहाँ बिलर गई है
सड़क
क्या पता
आदेश के इंतजार में
सचिवालय में या
मंत्रालय में ही बैठी हो अब
तक!
क्या पता मंत्री-निवास पर
माँजने लगी हो बर्तन!

क्या पता
सड़क वाले इंजीनियर के यहाँ
भरने लगी हो पानी!

ये सड़क के ठेकेदार भी
कम थोड़े ही होते हैं
क्या पता सड़क को
दबाने पड़ रहे हों
वहाँ उनके पाँव!

अब आयेगी
तभी तो पता चलेगा न!
कि
कहाँ बिलर गई थी सड़क
इतने बरस...

कविता भर जमीन

इस समय
कविता की हिफाजत करो
क्योंकि हर तरफ से
असहाय होते मनुष्य के पास
हाथ टेकने के लिए
अंतत: रह जाएगी
बस यही
कविता भर जमीन
जितनी किसी टापू की
फुनगी पर
मिल जाती है गौरैया को
इत्मिनान से सुस्ताने के लिए
जगह
कविता भर जमीन
जहां बचा रहेगा
अंतिम समय में
आत्मरक्षा के लिए
छुपाया अंतिम अस्त्र
कविता भर जमीन
जितनी मनुष्यता के ध्वज को
फहराने के लिए जरूरी है
इसलिए
कविता की हिफाजत करो
क्योंकि कविता
आत्मा की धड़कन है.

आस न छोड़ो

मुश्किल आई है
तो क्या है
यह तो जल्दी हट जाएगी
घुप्प अंधेरे कमरे में यूँ
मुश्किल ओढ़े
अवसादों से
घिरे हुए तुम
घबराए से
क्यों बैठे हो!
जरा टटोलो
दीवारों को
उम्मीदों की अंगुलियों के
कोमल जिंदा इन पोरों कसे
आहिस्ता-आहिस्ता खोजो
हाथों से दीवार न छोड़ो
कमरे की इन दीवारों में
कोई खिड़की निश्चित होगी
जिसके बाहर
बाँह पसारे, स्वागत करने
नई रोशनी मिल जायेगी
जुगनू होंगे, दीपक होगा,
चांद सितारे कुछ तो होंगे
सूरज भी आ ही जाएगा
आस न छोड़ो
मुश्किल में तुम
आस न छोड़ो

शब्द

ठीक इसी तरह डटे रहना
शब्द!
अपने मोर्चे पर
डट कर करना मुकाबला
दैन्य से, दुख से, सन्नाटे से
स्वार्थ से, संदेह से...
शब्द! घर से चलते वक्त
ठीक से जांच लेना
अपने अस्त्र शस्त्र
अपना रक्षा कवच
अपने वाहन के
पहियों की हवा, ब्रेक, ईंधन
और दीगर सामान
शब्द!
इससे पहले
कि सूरज खुदकुशी कर ले
तुम्हें ही पहुँचना है
हर एक सिपाही तक
रसद व शस्त्र की तरह
उजास भरा मेरा मन्तव्य
मेरा समर्थन
मेरी शुभकामनाएँ
शब्द!
इस कठिन समय में
डटे रहना
अपने मोर्चे पर

पूजा

दुख में डूबे हुए
कम से कम
एक असहाय के कंधे पर
रख दो हाथ
दे दो उसे सहारा
भर दो उसमें
दुख से लड़ने की शक्ति
मान लो
हो गई पूजा!

© 2009 Hareram Sameep; Licensee Argalaa Magazine.

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